Thread: musafir hu (No Holds Barred)
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Old 12th March 2017
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~हेल्लो!
~हाँ!
~क्या कर रहे हो?
~शर्ट प्रेस कर रहे हैं।
~अच्छा, हम भी तैयार हो रहे हैं।
~रुक नहीं सकती?
~अरे बाबा, होली में घर तो जाना ही पड़ेगा ना।
~हम्म, हमारा बहुत मन था तुम्हारे साथ होली खेलने का!
~अच्छा जल्दी करो, हमें लेट हो जायेगा घर पहुँचने में।
~ठीक है, 10 मिनट में लंका पे मिलो।
~ओके, टाइम पे आ जाना।
दोनों मिलते हैं। और वो खूब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगती है।
~क्या हुआ?
~होली के टाइम में कोई इतने अच्छे से शर्ट प्रेस करके पहनता है क्या!
~अरे, आज होली थोड़ी है।
~अच्छा (अपने बैग से गुलाल निकलते हुए) तो कब है?
~यार! ये बहुत ग़लत बात है।
~haha, बुरा ना मानो होली है!
और वो लंका से कैंट के पूरे रास्ते में बाइक पे पीछे से उसको रंग लगाती ही रहती है। शर्ट प्रेस करने के पूरे मेहनत पे गुलाल फिर गया था! दोनों उस रंग के साथ-साथ इश्क़ के रंग में भी रंग चुके थे। उदास भी थे कुछ दिन तक एक-दूसरे की झलक जो ना मिलेगी!
लड़की ने उस छः -सात घण्टे के सफर में एक बार भी अपना चेहरा साफ नहीं किया क्योंकि उसपे उसके प्यार का रंग चढ़ा था, और लड़का आईने के सामने खड़े होकर बस मुस्कुरा रहा था!
आज दोनों अलग-अलग शहरों में हैं। होली के रंग में अब भी रंगते है, मगर इश्क़ का रंग अब ग़ुम हो चुका है!

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