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  #1  
Old 11th July 2015
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वासना मय हों....

दोस्तों अडल्ट स्टोरी राइटिंग एक बिल्कुल नए अंदाज में पेश कर रहा हूं। सेक्स के लेकर हर युवा मन में फेंटेसी होती हैं। पड़ोस वाली भाभी, रिश्ते में कोई कमसिन या राह चलती हसीना...देखकर एक बारगी उत्तेजना की लहर दौड़ जाती है। कोई ऐसा नहीं जिसने खूूबसूरत लड़कियों को देखकर मन में उसके साथ सेक्स की कल्पना न की है...बस मैं इन्हीं कल्पनाओं को साकार करने की कोशिस कर रहा हूं... आशा है आप लोगों को प्रयास पसंद आएगा..
महत्वपूर्ण सुझावों से अवगत करवाएं या अपनी फेंटेसी बताएं

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  #2  
Old 11th July 2015
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दोस्तों पहली कहानी है, मेरे और मेरी मौसी की लड़की के बारे में इसे पढ़कर सेक्स और वासना की दुनिया में डूूब जाईए....

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  #3  
Old 11th July 2015
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सरिता की मासूमियत

मेरी दूर की मौसी की दो बेटियां है। बड़ी का नाम सरिता और छोटी का नाम कविता है। छोटी तो भी काफी छोटी है, मगर बड़ी बेटी सरिता, क्या लगती है। वैसे तो उसकी कद-काठी साधारण है, मगर एक चीज जो उसे खास बनाती थी, वह उसका सफेद गोरा रंग और उसके एकदम तने चूंचक। उसकी कुर्ती के ऊपर किसी पहाड़ की तरह हमेशा तने नजर आते थे उसके चूंचक। अकसर मेरे घर आ जाया करती थी। कभी-कभी मुझसे थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेती थी। उसकी एक अदा या यूं कहें कि लापरवाही थी कि वह कभी दुपट्टा नहीं पहनती थी। उसकी कुर्ती में से यूं तो उसके चूंचकों की एक झलक तक नहीं मिलती थी। क्या करें उसकी मां इतने तंग गले का सिलवाती थी, मगर एकदम तीर की तने उसके चूंचक हमेशा निमंत्रण से देते प्रतीत होते थे। यही वजह थी मैं उसके प्रति आकर्षित हो गया। मैं उस समय कॉलेज में पढ़ता था और वह भी दो बार इंटर फेल होकर फिर से इंटर की तैयारी कर रही थी, प्राइवेट। उसे पढऩे-लिखने से कोई मतलब नहीं था। बस दिनभर घर का काम या फिर मस्ती। कभी कुछ मांगने तो कभी कुछ देने मेरी मां को मौसी-मौसी करते हुए दिनभर में कई चक्कर लगा देती थी। मगर मैं इतना शर्मीला था कि कभी हिम्मत नहीं हुई कि उसके साथ कुछ गलत हरकत कर सकूं। खैर मुझे मौका तब मिला, जब मेरी दीदी से उसकी थोड़ी ज्यादा पटने लगी और मौसी ने मेरी दीदी से कहा कि इसे थोड़ा पढ़ा दिया करें ताकि यह इस बार तो पास हो जाए। उसे दिन में तो समय मिलता नहीं था, सो रात में किताबें लेकर चली आती और मेरी दीदी का सिर खाती। पढऩे में उसका मन लगता नहीं, दोनों पता नहीं क्या-क्या बातें किया करते या फिर टीवी पर सीरियल देखते। खैर मुझे मौका तब मिला जब वह पहली बार मेरे घर पर ही सो गई। मै बस इतना चाहता था कि एक बार उसके चूंचक को बिना कपड़ों के छूकर देखूं कि क्या वाकई ये इतने ही तने हैं। बस तो फिर मैने थोड़ी हिम्मत की और रात में सबके सोने के बाद उस कमरे में गया, जहां वह और मेरी दीदी एक ही पलंग पर सोती थीं। मैने देखा कि वह पलंग के एक किनारे पर गहरी नींद में सो रही थी। मैने चादर उठाकर धीरे-धीरे अपना हाथ अंदर सरका दिया। मेरा हाथ सीधा उसके चूंचकों से जा टकराया। मेरे लंड में करंट का एक झटका सा लगा। मैने धीरे से उसकी एक चूंची को थामा ही था कि वह कसमसाने लगी। डर के मारे मेरी जान सूख गई और मैं तेजी से अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया। कुछ देर बाद मैने देखा कि वह भी उठी और बाथरूम जाकर वापस आकर अपने कमरे में चली गई। इसके बाद मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं उसके पास जाऊं।
इसके बाद तो यह तकरीबन अकसर होने लगा। वह पढऩे आती और पढऩे से ज्यादा दीदी के साथ बातें करती, टीवी देखती और फिर वहीं सो जाती। मैं कभी-कभी उसके बिस्तर के पास जाकर उसके चूंचक छूने की कोशिश करता, मगर पता नहीं क्यों वह गहरी नींद नहीं सोती थी या सो नहीं पाती थी। हर बार जैसे ही मैं उसके शरीर को हाथ लगाता, वह कसमसाने लगती और मुझे भागना पड़ता। इस तरह कई कई महीनें निकल गए, मगर मेरी मुराद पूरी नहीं हो पा रही थी। मै सोचता था कि क्यों चूंचक छूते ही वह कसमसाने लगती। मेरे दिमाग में अचानक एक आईडिया आया कि हो सकता है कि चूंचक इसके शरीर का सबसे सेंसेटिव हिस्सा हो। उसे छूने पर उसे भी करंट जैसा लगता होगा या गुदगुदी होती होगी। तो मैं क्या करूं, मैं इसी उधेड़बुन में लगा रहता था। आखिर मैने सोचा कि क्यों न इसकी चूत छूकर देखी जाए। इसकी चूत भी तो इसकी चूंचक की तरह ही नर्म होगी। और मैने तय कर लिया इस बार जब भी वो मेरे घर सोएगी मैं उसकी चूंचियों को हाथ तक नहीं लगाऊंगा। दो दिन बाद ही यह मौका आ गया।
वह फिर से पढऩे आई और टीवी देखने के बाद दीदी के कमरे में जाकर सो गई। अब तो उसकी मां को भी इस सबकी आदत हो गई थी तो जब भी वह नहीं जाती वे पूछने तक नहीं भेजती थीं। इस बार मैने आधी रात तक का इंतजार किया। मैं आज किसी भी कीमत पर उसके कपड़ों के अंदर हाथ डालना चाहता था। काफी देर बाद जब मुझे भी नींद आने लगी तो मैं उसके बिस्तर के पास गया। इस बार मैं उसके पैरों की तरफ बैठा था। चित लेटी थी। मैने धीरे से हाथ चादर के अंदर सरकाया। उसकी कुर्ती सरककर ऊपर आ गई थी। मेरा हाथ उसके चिकने पेट से टच हुआ, मगर मैने तुरंत हटा लिया। फिर मैने हाथ नीचे किया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर धीरे से टच किया। उसकी चूत काफी नर्म और गुदाज थी। मैं थोड़ी-थोड़ी देर बाद उसकी चूत को ऐसे ही ऊपर से टच करता रहा। आज वह घोड़े बेचकर सो रही थी शायद। मेरी हिम्मत अब खुलने लगी। मैने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और कुछ देर वैसे ही रखा रहने दिया। सलवार के ऊपर से उसकी चूत के गुदगुदेपन का अहसास हो रहा था। फिर मैने हाथ ऊपर सरकाया और नंगे पेट पर हाथ रख दिया। कुछ देर उसकी रिएक्शन का इंतजार करने के बाद दूसरा हाथ भी चादर के अंदर ले गया और उसकी सलवार का नाड़ा पकड़कर थोड़ा उठा दिया ताकि मेरा हाथ अंदर जा सके। मैने हाथ धीरे-धीरे अंदर सरकाया और चड्ढ़ी की इलास्टिक ऊपर कर चूत पर धर दिया। मेरा हाथ अब उसकी नंगी चूत पर था। मेरा लंड झटके से सलामी मार रहा था। उसकी चूत पर मुलायम और रेशमी बाल थे। इतने नरम कि मानो रेशम हो। मै धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा, फिर एक उंगली उसकी चूत के दरार के बीच ले गया। जैसे ही उंगली से उसकी चूत की दरार में सहलाया, वह तेजी से कसमसाई। मैने उससे भी यादा तेजी से अपना हाथ निकाला और अपने कमरे में भाग गया। मगर मुझे डर लग रहा था कि कहीं सरिता जाग न गई हो। अगर जाग गई होगी तो सुबह मेरी खैर नहीं। मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना करता हुआ सो गया।

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  #4  
Old 11th July 2015
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nice story started..........reps added for your efforts...............

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  #5  
Old 12th July 2015
ankur79 ankur79 is offline
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NICE ONE..........

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  #6  
Old 12th July 2015
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KEEP IT UP..........

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  #7  
Old 12th July 2015
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aap ki sarita ki chut kuchh aisi hai majedar


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  #8  
Old 17th July 2015
mastana.mastram mastana.mastram is offline
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सरिता की मासूमियत 2

शायद भगवान ने मेरी सुन ली थी या फिर हो सकता है कि सरिता की नींद न खुली हो। सुबह उसने किसी से कुछ नहीं कहा और मैने मन ही मन कसम खा ली कि अब इसके पास नहीं जाउंगा। भाड़ में जाए इसकी चूत और चूंची। अरे जान है तो जहान है। अगर इस बार इसकी नींद खुल गई तो मैं तो गया। घर में पिटाई पड़ेगी और पूरी रिश्तेदारी में बदनामी होगी वह अलग। मैने मन में यह फैसला लिया और इसके बाद सरिता से दूर-दूर रहने लगा। वह आती तो भी उसकी तरफ नहीं देखता, क्योंकि उसकी तरफ देखने से मन तो बहकता ही था ना। ऐसे ही दो दिन निकल गए। एक दिन दोपहर का समय कॉलेज से घर आया तो ताला लगा पाया। मौसी से पूछने गया तो उन्होंने बताया कि सभी मेरे चाचा के घर गए थे। आज मेरे चचेरे भाई का जन्मदिन था।
मौसी ने कहा कि तुमको भी बुलाया है।
मैने कहा कि मौसी अभी तो मैं कॉलेज से आ रहा हूं। थोड़ा फ्रेश होकर सोऊंगा इसके बाद ही जाउंगा।
ठीक है, यह कहकर मौसी ने घर की चाबी दे दी।
मैं घर आया और कपड़े उतारकर फ्रेश होकर नहाया और फिर सोने गया। एक घंटे बाद उठा और चाय बनाकर पीते हुए टीवी देख ही रहा था कि दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। मैने उठकर दरवाजा खोला तो देखा सामने सरिता खड़ी थी। वह कुछ लेकर आई थी। उसके हाथ में कटोरी थी, उसने कहा,
भैया शकर चाहिए। घर पर खतम हो गई। मां भी छोटे मौसा के घर चली गई हैं। मुझे चाय पीनी है।
मैने नजरें चुराते हुए कहा, अंदर किचन से ले लो और फिर से टीवी देखने लगा।
कुछ देर बाद वह किचन से लौटी तो उसके हाथ खाली ही थे। वह अचानक मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसने कहा,
भैया एक बात पूंछू। सच-सच बताओगे।
मैने कहा हां पूछो। क्या बात है।
उसने कहा, भैया रात में मैं जब सो जाती हूं तो आप मेरे शरीर को क्यों छूते हो।
यह सुनकर मेरा तो दिल धक्क से रह गया। यानी इसे सब पता चल गया। हे भगवान अगर इसने किसी को कुछ बता दिया तो। मैं हकलाने लगा..
छूता हूं.. कब छूता हूं.. सरिता तुम्हें कोई वहम हुआ या सपना देखा होगा।
वहम नहीं भैया मुझे पता है कि रात मे मैं जब सो जाती हूं तो आप आकर मुझे यहां-वहां छूते हो।
नहीं सरिता, मैं भला क्यों छुउंगा। मुझे क्या जरूरत तुम्हे छूने की।
वो मुझे नहीं पता, मगर मुझे पक्का पता है कि आप मुझे छूने के लिए रात में आते हो। वह अब जिदभरे स्वर में बोली।
देखो सरिता तुम गलत सोच रही हूं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।
नहीं भैया आपने मुझे छुआ है, पता नहीं कहां-कहां हाथ लगाया है।
अच्छा कहां हाथ लगाया। अब मुझे गुस्सा आने लगा था।
इसके बाद उसने जो हरकत की उसकी तो मुझे कल्पना तक नहीं थी। उसने अपना हाथ सीधे अपनी चूत पर रखा और कहा,
आपने मुझे यहां हाथ लगाया था। मुुझे सब पता है।
उसकी इस हरकत पर एक बार को तो मैं चकरा गया, मगर फिर थोड़ी हिम्मत जागी कि कोई लड़की यदि किसी लड़के के सामने इस तरह की हरकत कर रही है, मतलब खुला इशारा कर रही है।
मैने शरारती स्वर में पूछा, कहां हाथ लगाया था?
यहां। उसने एक बार फिर से अपनी उंगली अपनी चूत पर रखकर कहा।
इस बार मैं उठा और अपनी उंगली उसकी कुर्ती पर उस स्थान पर रखकर, जहां उसकी चूत थी, मैने पूछा, यहां।
हां वो बोली, बिल्कुल यहीं, मगर यह कहते हुए उसका स्वर कांप रहा था।
मैने कहा सरिता मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा तुम कहां की बात कर रही हो।
इस बार उसने कुर्ती ऊपर उठाकर सलवार के ऊपर से चूत पर उंगली रखकर कहा यहां।
मैं भी मस्ती के मूड में आ गया था। मैने भी उसकी उंगली के पास अपनी उंगली रखकर पूछा, यहां?
हां वह कांपते स्वर में बोली।
मैने कहा रुको सरिता मुझे ठीक से समझने दो। यह कहकर मैने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार उसकी जांघों से सरकती हुई नीचे जा गिरी। उसने एक शब्द नहीं बोला, मगर शर्म से उसका मुंह लाल हो रहा था। मेरी आंखों के सामने तो जैसे बिजली ही चमक गई। उसकी गोरी जांघों के बीच नीली चड्ढी गजब ढा रही थी। मैने उसकी चड्ढी के ऊपर से ही चूत पर उंगली रखकर पूछा,
क्या यहां.. छुआ था?
हां, वह आहिस्ता से बोली।
मगर मैने ऐसे तो नहीं छुआ था। यह कहकर मैने उसकी चड्ढी भी सरका दी। उफ कितनी सुंदर थी उसकी चूत। मेरी आंखों में जैसे आग लग गई। दिल एक बार जोर से धड़का और फिर दौडऩे लगा। शर्म के मारे उसकी भी आंखें बंद हो गईं और मेरे हाथ-पैर भी उत्तेजना से कांप रहे थे। मेरा लंड तो मानो झटके खा-खाकर पागल हुआ जा रहा था। मैने इस बार उसकी नंगी चूत पर हाथ रखा और फिर से पूछा,
क्या यहां हाथ लगाया था?
इस बार वह कंपकंपाते स्वर में अटक-अटककर बोली, हं..हां.. भै..य्..या.. य..हीं.. छ..छ..छु..आ.. था..।
मैने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसका मुंह शर्म के मारे लाल सुर्ख हो गया था। गोरे चेहरे पर यह लालिमा गजब ढा रही थी। उसकी आंखें अब भी बंद थीं। होंठ धीरे-धीरे कंपकंपा रहे थे। मैने धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाते हुए कहा सरिता यहीं छुआ था न। वह हर बार लरजते स्वर में अं..हां.. बस यही करती रही। फिर मैने चेहरा आगे बढ़ाया और धीरे उसकी चूत पर चूम लिया। उसका पूरा शरीर कांप उठा। मैने एक ही चुंबन से बस नहीं किया बल्कि उसकी रेशमी, मुलायम, मखमल जैसी चूत को चूमता चला गया। उसके शरीर में इतनी तेज कंपकंपाहट हो रही थी कि शायद उससे खड़ा रहना मुश्किल होने लगा, तभी तो वह धम्म से वहीं पड़े सोफे पर गिर सी गई। मैने पूछा..
क्या हुआ सरिता..?
कुछ नहीं भैय्या.. मगर आप यह क्या कर रहे हो। मुझे कुछ अजीब सा हो रहा है।
मुझे पता था कि अब तक उसका शरीर बिलकुल अनछुआ था। इसीलिए उसकी यह हालत हो रही है। मैने कहा, कुछ नहीं होगा, सरिता।
भैय्या ऐसा मत करो न प्लीा.. मुझे लगता है मेरी जान निकल जाएगी।
मैने धीरे उसके होंठों को चूम लिया और कहा, कुछ नहीं होगा सारू। मैं हूं न।
मेरे इतना कहते ही वह मुझसे लिपट गई। मैं प्यार से उसके बालों में उंगलिया चलाने लगा।

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  #9  
Old 22nd July 2015
Sarma607 Sarma607 is offline
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  #10  
Old 21st September 2015
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